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मैं हूँ तुझमें कही
मैं हूँ तुझ में कही तु आजमा के देख ले मैं होता नही कही में फेल ये तु आजमा के देख ले मैं हूँ तेरे कितने करीब तु खुद नजदीक आके देख ले मैं य
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भ्रम ना पाले
लोग मुझे जाने पहचाने ऐसी भावना के बजाय, लोग मेरे लिए कोई भ्रम ना पाले, ऐसी भावना रखना श्रेष्ठ है।
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हिमाकत
ना जाने कौन सी हिमाकत की थी वक्त के साथ हमने, जिससे ऐसी नजाकत पेश की वक्त ने। आज वक्त, बेवक्त में ही काल बनकर आ रहा, इस धरा पर काले बादल स�
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विश्वास
हे प्रभु! जिनका आप पर विश्वास है, उनका विश्वास टूटने मत दो। रहमत आप उन पर, इस समय थोड़ी ज्यादा कर दो।
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आदर्श
विवेकानंद के आदर्शों को जीने के लिए युवाओं में विवेक की आंख और आनंद से भरा हृदय जरूरी है। विवेक व्यवहार कुशल बनाता है और आनंद से ही तो
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ऊंची उड़ान
जिनको ऊंची उड़ान भरनी हो, वे डोर के कटने और टूट जाने का भय नहीं पालते। उनके तो उत्साह के पंख लगे होते हैं और मंजिल पाने का जुनून भरा हो�
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लेकिन दिल मे ख़्याल सब का उतरता है
लम्हा जब गुजरता है तब मौसम बदलता है याद आए या न आए दोस्तों का लेकिन दिल मे ख़्याल सब का उतरता है लेखक आदर्श पाण्डेय
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ये ग़म भी हमसे जुदा है ।
ये ग़म भी हमसे जुदा है । ये मौसम भी हमशे खफा है ।। अब ख़्याल आए तो किसका आए। अब तो मुहब्बत भी हमशे जुदा है लेखक आदर्श पाण्डेय
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उसे प्यार की मेरे जिस्म पे
उसे प्यार की मेरे जिस्म पे, एक निशान चाहिए थी। मेरे होठो पर कटे हो ,उसके होठो से उसे प्यार की मेरे जिस्म पे ,यही निशान चाहिए थी ले�
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मै बनारसी पान
लेखक आदर्श पाण्डेय कविता - मै बनारसी पान मै बनारसी पान हो गया हूँ तुझे मालूम नहीं है मेरी जान तेरे इश्क की नई जुल्मो �
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झुकी झुकी नजरों से कमाल कर गई
झुकी झुकी नजरों से कमाल कर गई दिल बहल रहा था वो बवाल कर गई एक ही नजरों मे वो इजहार कर गई दिल को पुरा पत्थर से मूरत बना गई लेखक आदर्श �
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शहद के ज़िद मे जहर हो गया हूँ
शहद के ज़िद मे ,जहर हो गया हूँ समंदर के ख़्वाब मे नहर हो गया हूँ तमाशा पे तमाशा होता रहा जिंदगी का अब मै जिंदगी से पुरा बेघर हो गया हूँ ल�
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