डांट कर तो सब अपनापन दिखाते हैं,
लेकिन जो डांट कर मना सके,
वो शख्स चाहिए।
शक तो हर कोई करता है मुझ पर ,
लेकिन जो अटूट विश्वास दिखा सके ,
व� read more >>
एक शकुन था, अब वो ना रहा
एक जनून था, अब वो ना रहा
हम जलते रहे चिराग की तरहा
हमारा रूतबा, अब वो ना रहा
इस चका-चोंद जिन्दगी मे
हमारा फलसफा, अ� read more >>
मैं ये नहीं कहती हूँ कि बाकी भाषाएँ नेक नहीं
अंग्रेजी बोलना अच्छा है पर हिन्दी त्यागना ठीक नहीं
—त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’ read more >>
जुल्फों की घटाओं में क़मर खिली है -----
देख के छुपना , छुपके देखना -----
इसी अदाओं में छिपी है ----
हक़ीक़त आरजू फसाना ----
गुफ्तगू दिल की लब पे रुक गई - read more >>