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जुदा
मौज साहिल से जुदा कब -----💐2 काँटें फूल से -- पल भर के लिए ------2 बेवफा मेरे दिल से -------💐
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याद
दिल निकला बड़ा कम्बख्त ---------2 उस की यादों में रहता हर वक्त हुक निकला उस के नाम से - ----- बन्दा गया काम से --- ख्याल अपना कहाँ भूला ऐ दिल कम्बख्त
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राधेश्याम का संग जो मिल जाए
राधेश्याम का संग जो मिल जाए, मेरी किस्मत के ताले खुल जाए, मेरा जीवन सुधर जाए। जय श्री राधे कृष्णा
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व्यापार
व्यापार मात्र वस्तु का लेनदेन तक ही नहीं बल्कि रिश्तो कभी जरूरत के हिसाब से लेनदेन करने से है लेखक पंकज कुमारबुड़ाकोटी
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कुदरत
कुदरत ने जीना सीखा हमने यही हमारी धरोहर है जिसने किया अपमान इसका वही पूर्ण विरोधी है लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी
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समाज
एक अच्छे समाज की कल्पना करने वाले दूसरों को तो प्रेरित किया करते हैं परंतु खुद को प्रेरित करने की आदत से वंचित रहते हैं भूल जाते हैं �
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राधे राधे बोलिए
राधे-राधे बोलिए, मन के द्वार खोलिए, राधे-राधे रस कानों में घोलिए। जय श्री राधे
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दुनिया
दुनिया में रिश्तो से ज्यादा पैसों की अहमियत है चंद रुपयों की खातिर अपनो को शरेआम कत्ल होता है, और रुपयों के खाते हैं बेगानों को अपना बन
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किताब
किताबी ज्ञान से बढ़कर जीवन का संघर्ष हमें सिखाता है कि कब, कहां और किस परिस्थिति में हमें खुद कैसे हल ढूंढना है. लेखक पंकज कुमार बुड़ाक�
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कलम
गलत शब्दों का कागज पर उतारना कलम का दोष नहीं यह तो लिखने वाले की सोच और कलम चलाने के ढंग पर निर्भर करता है ।
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अपमान
अपमान करने के लिए बुरे शब्दों की जरूरत नहीं होती, किसी को बुरी निगाहों से देखना भी उसका अपमान होता है । पंकज कुमार बूडाकोटी
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तज़ुर्बा
तजुर्बा से कोई मोहब्बत नहीं होती किसी से बेपनाह मोहब्बत करके हर तरीके का तजुर्बा प्राप्त होता है। लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी
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