किसी से भी उम्मीद तब तक होती है जब तक हमें हर चीज पाने की लालसा रहती है, जिस दिन लालसा खत्म उस दिन से उम्मीदें भी खत्म.
लेखक पंकज कुमार ब� read more >>
सिर्फ़ तुम्हे देखता रहूं हर पल कोई और काम ना हो,
तुम्हारी आंखों से करूं नशा पीना कोई ज़ाम ना हो,
पागल" पागलों की तरह प्यार करता रहे तुम read more >>
उस कमबख्त बेवफ़ा से उसकी याद अच्छी है,
वो सब झूठ बोलती थी ये बिल्कुल सच्ची है,
उसका हुस्न आज बुढ़ापे के बोझ में दबा होगा.
"पागल" हैरा� read more >>