कभी नखरे हजार करके भी
वो जिद पुरी नहीं हो पाती जो हम पूरे करना चाहते हैं,
कभी नजरे सामने होकर के भी,
वो नहीं देख पाती जो हम देखना चाहते ह� read more >>
ईमान बेच चुके हैं, न जाने किस लाचारी में
खड़े हैं दो-चार, उस मक्कार की तरफ़दारी में
जिधर मिले मुनाफ़ा , उधर ही ढुनक जाते हैं
दो-चार बैंगन ऐस� read more >>
में नही जानती कि मेरी तकदीर में खुदा ने तुझे लिखा या नही ।
पर मेरा प्यार मेरे लिये खुदा की इबादत से भी कम नही ॥
जनत की चाह नही मुझे' तेरे � read more >>