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वतन मेरा प्यारा वतन
दुनिया से- न्यारा है मेरा यह प्यारा वतन दुनिया से- प्यारा है यह मेरा न्यारा वतन जगत में अलख- जगाता शांति का पाठ पढ़ाता जगत को- राह �
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भारत मांँ
मैंने यह सिर लिखा है वतन के नाम प्रेम दिल में लिखा भारत मांँ के नाम -मोती
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ये लिखा ख़त दिल के पन्नों में
ये लिखा ख़त- दिल के पन्नों में, ख़ुदा मियां के नाम पूछा मेरे भगवन्- तू रहता है कहां गुमनाम कहा प्रभु हरेक सांस में- तुम्हारे अंदर प्�
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शायरी
कभी जो सामना आपसे हुआ तो , अजनबी हम बन जाएंगे दिल टुटा है जख्म ताजा है और खुद को हम अब बिखरने न देंगे।
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शायरी
आपकी चाहत दिल में है बहुत तो शायद आप इसीलिए इतरा रहें हैं बिना आपके भी जीना सीख लेगें दिल को इए बातें समझा रहें हैं ।
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ख़ुद में ख़ुदा का है द्वार
सुनो अशुभ- बात भाई सुनो अशुभ बात, ख़ुद को ना- जानना सुनो है अशुभ बात, कहते ज्ञान सार- जग में मिलेंगे संत सुजान.... ए-तू- भवपार ख़ुद में �
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घट भीतर बाजे अनहद तूर
बाजे अनहद तूर- रे साथी बाजे अनहद तूर, घटे भीतर बाजे- रे साथी बाजे अनहद तूर, सब जनें सुनो- बन जाओ ज्ञानी कहते संत सुजान... जानो तुम- यह �
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प्रेम....!!!!
शिलाओं को आकृति बनते देखा हैं...! मैंने तुम्हें बहुत पास से, दूर जाते देखा हैं....!!
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बचपन
एक बचपन था, जो खिलौनों से बीत गया...! एक मन हैं, जो अब मौन(एकांत) चाहता हैं...!!
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"उड़ान"
"उड़ान" "ख्वाहिशों की एक लंबी उड़ान कभी-कभी औरतों के बसे-बसाये घर की गृहस्थी उजाड़ देती है,क्योंकि वहाँ मर्द की उड़ान छोटी पड़ जाती है"
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दिल चीर के
कोई पूछे मुझसे तो मैं बता भी दूँ। हे क्या दिल में मेरे कोई कहे तो मैं, अपना दिल चीर के दिखा भी दूँ। ना हो विश्वास अगर थोडा चलो मेरे साथ
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क्यों करता मानव गुमान रे
दिवाकर रोशनी तू ऊर्जा है, पवन तू हर सांस में जीवन है, तेरे बिना-ए-दुनिया-ए-जीवन कहां... फिर क्यों करता मानव गुमान रे... -मोती
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