था उसे प्यार हमसे
ना रहा उसे, ऐतबार खुद पर
कसूर किसका है?
मझधार मे बह गया जिसका सब कुछ
बच गया वो दर किनार किसका है?
जो ना रहा अपने हक में
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संसार-ए-माया-
का नाता ग़म ही ग़म है साथी रे,
बंधन छूटे ना-
काम-क्रोध-मोह-लोभ लिपटायो रे,
जे तू परमार्थ-
कमाओ करो जीवन सफ़ल भाई रे...
नेह � read more >>
हे खुदा से प्यार जितना
चाहा तुझे भी इतना।
हमेशा बसा रहे,तु दिल में
हे तुझसे प्यार इतना।
जो कभी खत्म ना हो
हे दिल में प्यार इतना।
🦋swami ganga read more >>