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यों ,खुल्लेआम जब कभी , मिलन मुनासिब, नहीं था ।। तो क्यों , मिलना मुनासिब समझा ।। फिर,दर्द दिया इतना क्यों .... ? हमें अपने काबिल समझा।। read more >>
चारों और मीठे शब्दों का मायाजाल फैला था । उसका हर एक शब्द पहला था । सरपरस्त, हम उल्झे थे ऐसे ।। सोचते हैं , आज तक उसने कौन सा खेल खेला थ� read more >>
चाहते हैं ।। कि यह मोहब्बत दर्द बन के एहसास एक बन जाए...... अब ,सोचते हैं ।। थोड़ी सी मुश्किलें आपके हिस्से में भी आए...... रंग चढ़े मोहब्बत क� read more >>
चाहत की बात न कर रहम ख़ुदा नहीं करेगा ।। जब टुटेगा , दिल इल्जाम भी खुदा पे नहीं पगली , जमाने पे लगेगा ।। read more >>
उन्हें पता था । के किस्मत, हमें कभी मिलने नहीं देगी।। इसीलिए वो हमसें शरारत करके चले गए...... read more >>
चाल तेरे हर खेल की मालूम है। समझ, बस तेरी थोड़ी सी कदर है दिल में इस वजह से हमने तुझे बेपर्दा नहीं किया। read more >>
जब गाता हूं अपना गीत, तुझे क्यों लगे अपना गीत, हम इंसानों की यही फ़ितरत है... हम बंदे एक ख़ुदा के हैं... -मोती read more >>
हर किसी का दिल मैं चुराता हूं, हर किसी को अपना बनाता हूं, बंदा फ़कीर प्रेम बांटता फिरता हूं... दिल-ए-भर लो प्रेम बांटते फिरो... -मोती read more >>
हम संग-संग जिए जाएंगे, महोब्बत में भीग जाएंगे, ये सबब दुनिया को दिए जाएंगे... हम प्रेम अमर कर जाएंगे... -मोती read more >>
ये हर सांस मेरी महक रही, एहसास में मैं हूं बहक रही, पिया दीदार को यूं तरस रही... तुझे दिल में मैं पूजती रही... -मोती read more >>
मुझे...'मैं' और...तुमसे..'तुम'..खो जाओ..ना कुछ तो ऐसा करो...और..'हम'..हो जाओ..ना..!! read more >>
किसको अपना समझे? अपने को या पराए को? किसको पराया समझे? पराए को या अपने को? read more >>
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