मैदान ए शायरी का एक प्यादा हूँ मैं,
. इस महदूद सल्तनत का वजीर नहीं हूँ
ग़ज़ल के नाम पे बस हाल ए दिल बयां करूँ,
. मैं बद्र , गालिब , या मीर नहीं ह read more >>
इस कदर बह रहे थे हमारी आँखों से आंसू,
रोके न रुक रहे थे हमारी आँखों से आंसू,
जब वो किसी ओर कि होने जा रही थी,
तो आंसूओं की मेहमानावाज़ी भी � read more >>
यूँ न देखा कर मुझ को,
मे महसूस कर रहा हूँ कि,
तेरी नज़रे मुझमें डुबकर,
मुकम्मल होना चाह रही है,
और यह मुमकिन न हो पाएगा,
में तेरे बिना हि म� read more >>