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न जाने कैसे नज़रो ही नज़रो में बहुत कुछ कह जाती हो तुम, और एक हम है जिन्हें अल्फाज़ों में भी समझाना नहीं आता। read more >>
छोड़ दिया मुझको आज मेरे अज़ीजों ने, दलिल यह दि कि में सच बहुत बोलता हूँ। read more >>
कुछ आदते बुरी भी है मुझमें, लेकिन तुझे याद रखने की एक बुरी आदत, अच्छी हे मुझमें। read more >>
चाहा तो लम्बा साथ था, लेकिन दो कदम भी साथ न चले। read more >>
मेरे पास ज़्यादा दोस्त नहीं, इसकि वजह यह भी है, कि मे सच्ची दोस्ती रखता हूँ, और सच्ची दोस्ती, आज के दौर में ज़्यादा टिकती नहीं। read more >>
वो निगाहों से ही इकरार करती थी, इकरार जब़ा पर कभी आया ही नहीं। read more >>
मोहब्बत हो तो ऐसी, के वो पास न हो, फिर भी यह एहसास न हो, के वो पास हे नहीं। read more >>
ऐ मोहब्बत ज़ख्म देना बंद कर मुझे, मेरी शायरी में दर्द झलकने लगा है। read more >>
कितनी आसानी से दिल तोड़ के कह दिया, गलती हो गई माफ कर दो, हमे तो एक ज़माना लगेगा, इस गलती को भुल जाने में। read more >>
आज जहां-जहां में जाता हूँ, वहां-वहां लोग नराज हो जाते है, क्यूंकि झुट को सच बोलने का हुनर नहीं मुझ में, और सच को न बोलने का ऐब नहीं मुझ में read more >>
मैंने टूटते हुए तारा, देखा है, और तुम्हारा इशारा देखा है....! मैंने एक पुराना ख्वाब देखा है और उसे टूटते हुए फिर दुबारा देखा है....!! read more >>
तु दिल में रहती एक आहट है, जब भी आती है, मुझे यादों की दुनियां में ले जाती है। read more >>
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