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मेरे लिए
मेरे लिए तुम कुछ भी कर लो ओ मेरे यार, दुनिया वालों को हैरत में डाल दो ओ मेरे हार। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीप�
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जीती जागती
प्यार की तुम जीती - जागती देवी हो हृदय की तुम जैसे सूरज की किरण हो । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहा
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हुस्न
तूँ हुस्न के रंगों से लिखी हुई ग़ज़ल है, प्यार के दरिया में खिलता हुआ कमल है।
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Karma
मैं उस दौर में हूँ जहां, सबके शामियाने हैं । हर जगह अपने लिए, सबके पास बहाने हैं ।। एक मेरा ही घरौंदा है, जहाँ दीपक जलता है और सभी को तो, ए�
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इच्छा
तुम इरादे बना लो, तो जोड़ सकती हो मुझे। तुम रास्ता बना लो, तो मोड़ सकती हो मुझे।। मैंने कुछ इस कदर कर दिया है, खुद को तेरे हवाले । कि म�
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हकीकत
वो बातों में शब्दों को कुछ ऐसे पिरोता है। कि जैसे हीरे के पानी से मोती को धोता है ।। मैं निशब्द हूँ उसके फलसफा-ए-जिंदगी को देखकर। कि
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दिल
अनजान हूँ मैं अपने ही दिल ऐ मिजाज से ये कमबख्त ख़ुद को ही तन्हा कर लेता है ।1। नहीं रह पाता है कभी उसके बगैर फिर क्यूँ ये उससे लड़ाई म�
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साथी
हाथों में तुम्हारा हाथ रहे चाहे सुख हो चाहे दुःख हो साथी तुम्हारा ही साथ रहे
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तू ही वह सुजान जान-ए-इंसा
तू ही वह सुजान जान-ए-इंसा, तू अपना ही गुर जान-ए-इंसा, सत् बसा हृदय तेरे तू जान-ए-इंसा... स्वर्ग-ए-धरती तू जान-ए-इंसा!!!! -मोती
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ज़िंदगी एक कहानी मेरी ज़ुबानी
ये ज़िंदगी है- एक कहानी मेरी ज़ुबानी, अनमोल है- ये जीवन सुनो मेरी ज़ुबानी, यह सब्जबाग- दुनिया हक़ीक़त की है छाया... हक़ीक़त- है सांस
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मानव दिखना नहीं बनना जरूरी है
मानव दिखना नहीं बनना जरूरी है, जग में मानवता बचाना जरूरी है, धर्म नहीं इससे बड़ा यह कार्य जरूरी है... महान-ए-मानव आत्मज्ञान जरूरी है।।�
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ये योग परमात्मा मिलन का है
ये ज़िंदगी- सांसों का आना-जाना है, हरेक सांस- जीवन का आना-जाना है, पल-ए-पल का जीवन- फिर माटी में मिल जाना बंधु रे... ये योग- परमात्मा मि�
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