"जिंदगी"
"जब कभी जिंदगी से हारने लगता हूँ,और खुद को अकेला पाता हूँ,तो कहीं रुक कर ओठों के ताज को सुलगा लेता हूँ,एक लंबा कश लेकर धुऐं के साथ read more >>
पल पल-
गुज़रते ए-जिंदगी,
के पल हर पल पल पल...
ना जाने कब साथ-
छोड़ेंगे ज़िंदगी के ए-पल...
जिसे गुज़र-
जाना ए-महोब्बत,
जिंदगी से क्यों किया read more >>
मीत मेरे मीत-
आ जा बीते ना ए-पहर,
पुकारे ये प्रीत-
आ जा बीते ना ए-पहर,
आ लौट के आ मेरे
मीत बीते ना ये दिन-ए-रैन,,
आ तुम बिन-
सूना है ये मन-म� read more >>