Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

बाल दिवस के लिए विशेषः पबजी प्रतिबंधित-वीरेंद्र देवांगना

बाल दिवस के लिए विशेषः
पबजी प्रतिबंधित
बिहार के गोपालगंज जिले में आनलाइन गेम पबजी में बार-बार हारने के बाद 14 वर्षीय छात्र हिमांशु कुमार ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वह राजेंद्र नगर इलाके में रहता था। गोपालगंज केंद्रीय विद्यालय में 9वीं का छात्र था।
उसके परिजनों के अनुसार, हिमांशु 13 मार्च की दोपहर पबजी खेल रहा था। वह बार-बार हारने से परेशान था। इसे लेकर घर के सदस्यों ने उसे डांट दिया। इसके बाद वह अपने कमरे में जाकर चुपके से कमरा बंद कर लिया।
गुजरात के आणंद जिले में पबजी के आदी बन चुके एक किशोर ने पिता के द्वारा डांटे जाने पर कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर लिया। किशोर के पिता शिक्षक हैं।
ब्लूव्हेल की तरह खतरनाक बन चुके आनलाइन गेम पबजी बच्चों व युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इस खेल का व्यवसन कतिपय बच्चों, किशोरों व युवाओं में इस कदर फैला हुआ है कि वे खाना-पीना, खेलना-कूदना और पढ़ना-लिखना छोड़कर इसी जानलेवा खेल में डूबे रहते हैं।
यह आभासी दुनिया का गेम है, जिसमें आनलाइन टास्क दिया जाता है। अलग-अलग स्थलों के अपरिचित और शौकीन बच्चे इसमें निरंतर जुड़ते चले जाते हैं। खेलने की लत और क्षणिक मनोरंजन के चलते ये आगे और आगे खेलते रहते हैं।
इस खेल में हिंसा, मारकाट, लड़ाई-झगड़ा, खूनखराबा सब होता है, जो बालमन को हिंसक, व्यभिचारी, अत्याचारी और बदमाश बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है।
जब एक बार इसकी लत लग जाती है, तब बच्चा इसका आदी हो जाता है। इसे अफीम या ब्राउनशुगर के घातक नशे की तरह खेलनशा कहा जा सकता है, जिसे बाद में छुड़ाना मुश्किल हो जाता है।
यह बच्चों को मनोरोगी बनाता है। आलसी बनाता है। जाहिल और काहिल बनाता है। शरीर से कमजोर व कामचोर बनाता है। उसकी मासूस संवेदनाओं का हरण कर लेता है। उनकी सोचने-समझने की शक्ति को क्षीण कर देता है।
वह पागलों-सा, सनकी-सा व्यवहार करने लगता है। आशय यह कि वह किसी काम के लायक नहीं रहता और जरा-जरा बातों में हिंसक हो उठता है।
जब कोई उसे इसको खेलने से मना करता है, तब वह माता-पिता सहित किसी पर भी हमला करने से नहीं झिझकता। सबको अपना दुश्मन समझने लगता है। गुमसुम बैठ जाता है। सबसे बोलचाल बंद कर देता है। सबको अपना बैरी मान लेता है या फिर खुदकुशी कर लेता है।
बच्चों के लिए खतरनाक होते जा रहे इस गेम को गुजरात सरकार ने 14 मार्च 2019 को प्रतिबंध लगा दिया है। गेम खेलते पकड़े जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। कारण कि वहां पबजी की वजह से कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। कइयों की जानें चली गई हंै।
गुजरात पुलिस के अनुसार, लगातार पबजी खेलते-खेलते 23 वर्षीय जगदीश भाटिया का मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। वह हिंसक हो गया था। अपने भतीजे को इस लत से उबारने के लिए उसके 41 वर्षीय चाचा प्रेमजी भाई झाड़फूंक का सहारा ले रहे थे।
इससे खफा होकर जगदीश ने अपने चाचा को चाकू से गोदकर हत्या कर दिया। वारदात के बाद जगदीश ने खुद ही अपने चाची को फोनकर हत्या की जानकारी दी थी।
पूरे देश में इसका दुष्परिणाम सामने आ रहा है। मासूम बच्चों के द्वारा स्कूल में बलात्कार, मारपीट और चाकूबाजी को अंजाम देना इसी गेम का बुरा नतीजा है। छग में भी यह गेम पैर पसारकर बालमन को कुत्सित कर रहा है। उत्तेजित कर रहा है।
यही वजह है कि भिलाई के पालकों ने छग में इस पर बैन लगाने के लिए गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू से आवेदन देकर निवेदन किया था। इन्होंने सांसद विजय बघेल से भी मुलाकात की थी। उनकी मांग थी कि पबजी को पूरे देश में प्रतिबंध लगाने के लिए सांसद इस मामले को संसद में पूरी संजीदगी से उठाएं।
यह कोरोना वायरस की तरह चीन का आयातित गेम है, जो बालमन को कुंठित कर रहा है। उन्हें खतरनाक दिशा में ले जा रहा है। उनका कहना है कि यदि बालपन नहीं बचेगा, तो देश का भविष्य सुरक्षित कैसे रहेगा?
शुक्र है कि भारत सरकार ने चीनी गेम पबजी पर प्रतिबंध लगाकर एक सराहनीय कदम उठाया है।
–00–

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp