मानवता होनी जरूरी है – दिशा शाह

मानवता होनी जरूरी है – दिशा शाह

इंसानियत / मानवता जो हर किसी में छुपी हुई होती है . बस हमें उस मानवता को ढूँढना होता है .जो आज कल मानवता बोहोत कम में ही नजर आती दिखाई देरही है . बाकि मनुष्य में इसीलिए दिखाई नहीं देती क्यों की वो मनुष्य केवल अपने बारे में सोचता है . दूसरे के बारे में सोचने को व्यक्त ही नहीं मीलता . वो सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए ही सोचता है . क्यों की उसके दिमाग में हमेशा नकारा सोच ही आते रहते है . इसके कारन दिन पर दिन नकार सोच के द्वारा गलत बनता जा रहा है , और उसमे इंसानियत/मानवता भंग होती जा रही है. और उसके कारन वो मनुष्य में कभी सकरात्मक अनुभूति नहीं आती . कभी दुसरो के प्रत्ये लगाव नहीं रहता . कही भी कोई भी दुर्घटना हो , कोई हादसा हो , कुछ गलत हो रहा हो , इंसान खून से लटपट हो , क. लोग खली तमाशा देखते है . कोई कुछ नहीं कर रहा , कोई इस चकर में नहीं पड़ना चाहते सब अपने रास्ते चलने लगते है. नही तोह किसी की मदद न मिलने से मोत हो जाती है . कभी देर से इलाज होने से इंसान की रास्ते में ही मोत हो जाती है .कोई भला इंसान ही मरीज को अस्पाताल ले जाता है. औऱ इंसान की जान जाती है. इंसान के लिए फरिस्ता भगवान से कम नहीं होता. मानवता से बढ़ कर कोई धर्म नहीं होता . इस दुनिआ में मानवता को आगे ला के देश में जो भी हो रहा इसे केवल मानवता ही नाश कर सकती है.

दिशा शाह
कोलकाता (पस्चिम बंगाल)

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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