बेटा किसान का

बेटा किसान का

हमारे देश की है जो आन
मेहनत है जिसकी शान
ऊँचा है जिसका मान
और नहिँ वो है हमारा किसान

कडी धूप मेँ तपके जिसने
बनाई बँजर हरि-भरी
गर्मी सर्दी सहि जिसने खरी-खरी
दुनिया का भरता है जो पेट
मुश्किले और संघर्ष साथ है जिसके घडी-घडी

बनना चाहते है इनके बच्चे भी
डाक्टर इंजिनियर और विग्यानिक
पर इन्हे मील नहिँ पाता समय पर पैसा
किसान को मील ना पाए
खाद बीज और भाव फसल का

लेना पडता है इन्हेँ
बनिये से भारी ब्याज दर पर पैसा
बाजार जाए तो…2
भाव सुनकर उड जाते हैँ हौँस

अब कैसे चले ये जीवन के दो कौस
अब कैसे चले ये जीवन के दो कौस
भगवान का कैसा है ये रौष
भुगतते है ये सजा बिना किसी दोष
जानु मैँ ये सब गहराई से
क्योँकि मैँ भी हूँ बेटा किसान का!

  • आशीष घोड़ेला

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