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बेटा किसान का

हमारे देश की है जो आन
मेहनत है जिसकी शान
ऊँचा है जिसका मान
और नहिँ वो है हमारा किसान

कडी धूप मेँ तपके जिसने
बनाई बँजर हरि-भरी
गर्मी सर्दी सहि जिसने खरी-खरी
दुनिया का भरता है जो पेट
मुश्किले और संघर्ष साथ है जिसके घडी-घडी

बनना चाहते है इनके बच्चे भी
डाक्टर इंजिनियर और विग्यानिक
पर इन्हे मील नहिँ पाता समय पर पैसा
किसान को मील ना पाए
खाद बीज और भाव फसल का

लेना पडता है इन्हेँ
बनिये से भारी ब्याज दर पर पैसा
बाजार जाए तो…2
भाव सुनकर उड जाते हैँ हौँस

अब कैसे चले ये जीवन के दो कौस
अब कैसे चले ये जीवन के दो कौस
भगवान का कैसा है ये रौष
भुगतते है ये सजा बिना किसी दोष
जानु मैँ ये सब गहराई से
क्योँकि मैँ भी हूँ बेटा किसान का!

  • आशीष घोड़ेला
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Ashish Ghorela

Ashish Ghorela

उभरते हुए रचनाकारों और लेखकों को एक समृद्ध मंच प्रदान करने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 26 जनवरी 2017 को साहित्य लाइव की शुरवात की। जिससे उभरते हुए रचनाकारों का सम्पूर्ण विकास हो सके तथा हिंदी भाषा का प्रचार और विकास में वृद्धि हो सके। वैसे मैं हिसार (हरियाणा) का निवासी हूँ और दिशा-लाइव ग्रुप का संस्थापक हूँ।

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