छूं आसमान ओ बेटीयों-जितेंद्र शिवहरे

छूं आसमान ओ बेटीयों-जितेंद्र शिवहरे

छूं लो आसमान ओ बेटियों
लो खूद को पहचान ओ बेटियों

नारी शक्ति दुनिया जान चुकी
कितनी वीरांगनाएं ये मान चुकी
हो तुम्हारा भी गुणगान ओ बेटिओ
लो खूद को पहचान ओ बेटियों

बेटी अनमोल गहना है
बोझ नहीं इसे बस साथ रहना है
आत्मनिर्भरता पे इसे नहीं है गुमान ओ बेटियों
लो खुद को पहचान ओ बेटियो

त्याग समर्पण अनुठे वस्त्र है
परमार्थ आकर्षण सर्वत्र है
बनाये तुम्हे दुनिया मेहमान ओ बेटियों
लो खुद को पहचान ओ बेटियों

 

         जितेंद्र शिवहरे
       चोरल, महू,इन्दौर

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