क्यों दिल तोरी, मुझे ही छोरी – जब प्रेममय दुनिया सारी है – प्रेम शंकर झा

क्यों दिल तोरी, मुझे ही छोरी – जब प्रेममय दुनिया सारी है – प्रेम शंकर झा

मेरी जिसको परवाह नहीं ,
हमको तो परवाह उसी का है |
यहां बातें मेरे गम का नहीं ,
पर बात उसकी खुशी का है|
दुआ है तुम हर पल खुश ही रहो,
क्योंकि सारी दुनिया तो इसमे ही है |
ना तुम सोचना, कोशिश भी करना,
देने खुशी, बनाने पुन: प्यार का राही,
चखा है मैने, बाद इस अनुभव के,
प्रेमपीडा़ की स्वाद थी कितनी खाड़ी |
देख दूसरे को दुःखित होना ,
यह आदत पुरानी मानव की है,
मैं भी ग्रसित हूँ इसी दुख से ,
सोचा न तू भी दानव सी है |
जितनी ही दी साथ तूने ,
उतनी ही जीवन आभारी है ,
मेरे जीवन की कोई और नहीं,
सदा तुम ही तो एक प्रभारी है|
मिले समय तो जरूर पढ़िए
कहना था एक ही बात प्रिये
क्यों दिल तोरी,मुझे ही छोरी
जब प्रेममय दुनिया है सारी

Prem Shankar Jhaप्रेम शंकर झा,
भागलपुर, बिहार

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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