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पेड़ पर घोंसला परिंदे का-अमित गोस्वामी

लोग आए पेड़ को काटने और काटते रहे।
बैठ जमीन पर परिंदे से निहारते रहे।
ना बोले हमसे कुछ ना बोल पाए वो ।
बस आंसुओं को अपनी आंख से निकालते रहे।
जो बनाया था अपना आशियां उस पेड़ पर कभी उसे ही आज उजाड़ते रहे ।
लोग आए पेड़ काटने आ काटते रहे।

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