तेरी तस्वीर-फरहाना गौहर

तेरी तस्वीर-फरहाना गौहर

तेरी तस्वीर मैंने बनायीं है दिल को घायल बनाने की खातिर
फ़ुरक़तें अब हमें डनस रही है बहुत खुद को पागल बनाने की खातिर
गुलशने दिल में अब फूल खिलते नहीं
मन के आंगन में गुंचे महकते नहीं
सारे अरमानो के फूल मुरझा गए
हर तरफ वहशतें हम तो घबरा गए
अब कान्हा हैं बहारों के वो दिन हंसी
दिल की वहशत मिटाने की खातिर
तेरी तस्वीर …….
किउं जुदा हम हुए ये अलग राज़ है
ये कसक दर्द ये जख्म हम राज़ है
सौदा होता नहीं चाहतों में कभी
तूने जाना नहीं जान लेगा कभी
दिल का ये जख्म ताज़ा रहे हर घडी याद इसको दिलाने की खातिर तेरी तस्वीर …….
आ ज़रा सोच ले हम को क्या क्या मिला
दर्द तन्हाई का बेकारा सिलसिला
ये उदासी का आलम यंहा से वंहा
दिल को खुशियां नज़र आएगी अब कान्हा
ज़िन्दगी एकदम फीकी फीकी लगे
उसमे कुछ रंग लगाने की खातिर तेरी तस्वीर मैंने बनायीं है दिल को घायल बनाने की खातिर

                  फरहाना गौहर
              मालेगांवमहाराष्ट्र

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