Tanay Tripathi 25 Oct 2026 कविताएँ समाजिक #आज़ादी #अमर #प्रहरी" 41 0 Hindi :: हिंदी
“आज़ादी का अमर प्रहरी" वर्ष 1906 में भारत माँ के एक वीर ने जन्म लिया, बचपन से ही मन में अपने आज़ादी का सपना लिया। कभी न गुलामी की मानसिकता, मौत का भय न कभी छू पाया। भारत माँ का वो वीर सपूत, ब्राह्मण शिरोमणि, पंडित जी कहलाया। जनेऊ धारण करते थे, मूँछों पर ताव देते थे, शेरों की भाँति जीते थे, क्रांति का वो एक शोला थे। चौबीस वर्ष का वो क्रांतिकारी, भारत माँ के राजदुलारे थे। जेहन में आज़ादी की चाह लिए, मरने के बाद भी वो आज़ाद ही थे। बेख़ौफ़ होकर जीवन में वो हर संघर्ष से लड़ते थे। सिर पर कफ़न बाँधे वो, देश को आज़ाद कराने निकले थे। मौत भी थर-थर काँपी जिनसे, मिट्टी के सच्चे रखवाले थे। भारत माँ के वीर सपूत वो, पंडित चंद्रशेखर आज़ाद थे।