Tanay Tripathi 25 Oct 2026 कविताएँ धार्मिक # बाँके बिहारी #हमारे # 🦚 42 0 Hindi :: हिंदी
🦚 बाँके बिहारी हमारे 🦚 साँवरा शरीर, मनमोहक छवि, बच्चे से बूढ़े तक दीवाने हैं सभी। मुस्कान में जैसे चाँदनी की चमक, देखें तो ठहर जाए हर किसी की नज़र। बाँसुरी की धुन पर गोपियाँ हैं नाचतीं, वृंदावन की गलियों में पायलें हैं बजतीं। राधा के संग जब श्याम चले वन-वन, प्रेम में झूम उठता है सारा वृंदावन। गायों को रखते हैं दिल के करीब, भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। मथुरा की गलियों में रास रचाते, विष्णु के आठवें अवतार कहलाते हैं। माखन चोरी और बाल लीलाएँ, गोपियों को खूब चिढ़ाएँ। नटखट नंदलाल की प्यारी अदाएँ, देख माँ यशोदा भी मुस्काएँ। अलौकिक, अतुलनीय, सबसे निराले, मोहित करें जो जन-जन को मतवाले। सोलह कलाओं से सुसज्जित हैं, भगवान श्रीकृष्ण सबसे निराले हैं। मोर मुकुट सिर पर, मुख पर मुस्कान, राधे संग विराजें, बढ़ाएँ वृंदावन की शान। जन्म लेते ही अधर्म का अंत किया, समय आने पर अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया। बाल रूप में लगते प्यारे, देवकी मैया के हैं दुलारे। दीन-दुखियों के हैं वे सहारे, ऐसे हैं बाँके बिहारी हमारे। होगी रात खुशहाल, झूम उठेगा हर परिवार। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर, जय श्री कृष्ण से गूँजेगा सारा संसार।