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चिता पर लाश

Rambriksh Bahadurpuri 22 Sep 2026 कविताएँ समाजिक #चिता पर लाश कवि रामवृक्ष बहादुरपुरी# सामाजिक कविता #चिता पर कविता लाश पर कविता 587 0 Hindi :: हिंदी

चिता सजायी गयी
लाश लिटायी गयी
लाश ने चिता से पूछा-
मुझे क्यों जलाती हो?
क्यों राख बनाती हो?
हंस कर चिता ने कही-
तुम कहाँ जलती हो
तुम तो अमर हो,
जलता है -
शरीर,
ईर्ष्या
द्वेष
पाप
पीर
और
मिट्टी का शरीर
मिट्टी मे मिल जाता है
राख बन कर।

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