नागमणि कुमार सिंह 29 Sep 2026 कविताएँ समाजिक दिल बसता है गाँव में 2219 0 Hindi :: हिंदी
कविता शीर्षक : दिल बसता है गाँव में आ गए शहर में रहने लगे फ्लैट में लेकिन आज भी दिल बसता है गाँव में I मुर्गा का बाँग देना, कोयल की आवाज सुनना, नीम का दातुन करना, घर के छतों पर लटकती सब्जियों का स्वाद चखना I बच्चों का बगीचों में खेलना, इठलाती तितलियों को पकड़ना, मिट्टी से खिलौने बनाना, कीत-कीत का खेल खेलना , फिर आपस में झगड़ना I बैलों की जोड़ी बनाना, किसानों का पसीना बहाना, खेतों की हरियाली देखना, गाय- भैंस का घास चरना I गाँव का चौपाल लगना, बरगद का पेड़ की छाया, दादी की कहानी सुनना, गाँव के मेले में जाना I चूल्हे की रोटी खाना, कुंआ का ठंडा पानी पीना, गाय का ताजा दूध लाना, मिल जुल कर त्योहार मनाना I घर के आँगन में , चिड़ियों का फुदकना, अमरूद के पेड़ पर तोता को बैठे देखना I कहाँ मिलता हैं इस फ्लैट में, आज भी मेरा दिल बसता हैं गाँव में I लेखक- नागमणि कुमार सिंह