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इंसाफ - क्यो, भगवान आपका ये भेद भाव होता है

Pragati Rai 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक इंसाफ 56814 0 Hindi :: हिंदी

क्यो, भगवान आपका ये भेद भाव होता है,

कहीं कष्ट तो कहीं खुशी का मौसम होता है,

लोग कहते हैं, कि तू कण कण में होता है, 

तो क्यो मंदिर और मस्जिद के लिये बवाल होता है,

क्यो, भगवान आपका ये भेद भाव होता है,

लोग कहते हैं, कि आदमी औरत  तेरा ही बनाया होता है,

तो क्यों अग्निपरीक्षा से औरत को ही गुजरना होता है,

लोग कहते हैं, कि अल्लाह भगवान सब एक होता है,

तो क्यों, धर्मो के नाम पर मंदिर और मस्जिद गिराया जाता है,

क्यो, भगवान आपका ये भेद भाव होता है,

*नाम - प्रगति राय*
*ग्राम- रईसा*
*पोस्ट- कसारा*
*जिला- मऊ*

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