Krishan kumar 18 Aug 2026 कविताएँ अन्य इतिहास का पतन। वीर रस की कृष्ण कुमार द्वारा लिखी गई सुप्रसिद्ध बेहतरीन कविता। 3147 0 Hindi :: हिंदी
युद्धों के बेटे जब से बुद्धों के बीच उलझ गए कहां अखंड भारत हुआ करते थे हम कटक से अटक तक को भी तरस गए हाथ आए शत्रु को यूं ही जीवन दान नहीं देते वीर लड़ते रणभूमि में जब शत्रुदल पर दया नहीं करते जितना हम उदार बने हमारा उतना पतन हुआ इस करुणा के हर एक मोड़ पर भारत का एक नया विभाजन हुआ साम्राज्य हमारा जो अकंटक था कितने टुकड़ों में बंट गया आर्यों की जननी आर्यावर्त यह भूमि का टुकड़ा बन कर रह गया हर जगह करुणा ही उपाय नहीं दया हर वेदना की दवाई नहीं कभी रक्त खप्पर भर दो रणचंडी का शत्रु दल के मुंडमालों से शत्रु का मन भयभीत करो अपने रक्तरंजीत भालों से कभी सत्य की जीत होती शोणित पीती तलवारों से क्षात्र धर्म के पालन ने आदर्श से लड़ना सिखलाया है कब किस पर वार करो कब किसका संहार करो युद्ध में कितना विनाश करो परन्तु वृथा मत निर्वाह करो यदि शत्रु भी आदर्शवादी है तभी आदर्श के संग लड़ो जब वो युद्धनीति का पालन करे तभी तुम भी पालन करो अन्यथा सर्वत्र विध्वंस करो अपने शस्त्रों की शोणित पीने की पिपासा को तुम शांत करो जिस खोखले विचारों के कारण हमारा इतना पतन हुआ राष्ट्र का न जाने कितना विभाजन हुआ उस झूठी अहिंसा को त्याग दो जबतक शत्रु को मारने की शक्ति तुम्हारे पास है तब तक सारे बैरी भी तुम्हारे यार हैं कहा था एक बार पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने परमाणु भी शांति का हथियार है अती उदारता दिखलाना भी कायरता का ही नाम है