Tanay Tripathi 25 Oct 2026 कविताएँ समाजिक #क्या #हम #सच 39 0 Hindi :: हिंदी
*क्या है हम सच मै विश्वगुरु* रह जाते हैं युवा बेरोज़गार यहाँ, हो जाती हैं परीक्षाएँ रद्द यहाँ। इन भ्रष्टाचार के कर्ता-धर्ता, होते हैं हमारे शासनकर्ता। जिस देश की सड़कों पर बेटी निडर चल न पाए, उस देश को विकसित कहने में समय अभी लग जाए। जाति-धर्म के झगड़ों में हम उलझ चुके हैं, सच कहें तो विकास की राह से हम भटक चुके हैं। अमीरों के ख़ज़ाने भरते जाते हैं हर साल, और किसान पूछता है—कब बदलेगा मेरा हाल? जहाँ गरीब को नसीब नहीं है दो वक्त का खाना, फिर भी नेताओं का मकसद है सिर्फ़ वोट पाना। खोखली है क़ानून व्यवस्था वहाँ, घूम रहे गुनहगार खुलेआम जहाँ। इन सवालों से कब तक नज़रें चुराएँगे हम, बदलाव की राह पर आखिर कब कदम बढ़ाएँगे हम। 🇮🇳✍️