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मोहब्बत का आशियाना

संजय कुमार श्रीवास्तव 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मोहब्बत का आशियाना / प्रेम कविता/ 43773 0 Hindi :: हिंदी

----: मोहब्बत का आशियाना :---------
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तुम बिन प्रीतम आती , मुझे कहीं नींद नहीं
रात को जागू दिन को जागू, जागू दिन और रात
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तुम ही बताओ प्रीतम मेरा ,कैसा होगा हाल
कैसा होगा हाल ,सूख में जल्दी जाऊंगा
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तुम बिन प्रीतम दुनिया से ,मैं जल्दी जाऊंगा
जो भी खता हुई हो उनको , माफ करो जल्दी
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वरना एक दिन तड़फोगी हां, कहां गया हमदर्दी
कहां गया हमदर्दी , दिन और रात पुकारोगी
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फिर भी मिलन नहीं होगा, दिन और रात पुकारोगी
प्रीतम मेरी बात मान लो, जल्दी आओ ना
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प्यार पुनः स्टार्ट करें तुम, जल्दी आओ ना
तुम जल्दी आओ ना
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------: राधा की याद कान्हा के नाम :-----
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तू हर गीत गुनगुनाती है
कान्हा की याद आती है
कान्हा का कैसा प्रेम था
मुरली की ता बताती है
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सखियों के संग राधे
मधुबन में रास रचाती
मोहन चले जब मथुरा
तो वादा कर गए
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प्यारी मैं जल्दी आऊंगा
धीरज बनाए रखिए
कह कर गए थे मोहन
परसो में आ जाऊंगा
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कर करके इंतजार राधे हुई अधीर
राधा के मुख से निकला
कान्हा बड़ा तू छलिया
अब तक नहीं हे आया
तू कह कर मुकर गया
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कान्हा को याद आई
राधे की मुस्कुराहट
कान्हा से भी ना रहा गया
हुए आंसुओं की बारिश
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कान्हा से आकर उद्धव
पूछते हैं हाल ब्रिज का
कान्हा ने तब सुनाई
वह प्रेम भरी गाथा
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उद्धव भी मन ही मन
रोने को आतुर
बोले बड़ी जटिल है
कान्हा तेरी कहानी
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कान्हा ने तब कहा
ले जाओ ब्रज को तार
राधे को तुम सुनाना
कहना कि वो  आ जाएगा
धीरज बनाए रखिए
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सुन उद्धव की वो वाणी
राधा हुई बबूला
कहने लगी है उद्धव
तुम जाओ लौट वापस
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किस्सा न तुम सुनाओ
कहने लगी हे उद्धव
अब कैसे हम जिएंगे
एक दिल था मेरा पावन
जो कान्हा ले गए
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कहने लगी है उद्धव.....
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------ : कलम की दास्तान :------
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कलम दुख-दर्द लिखती है ,कलम सुख गम भी लिखती है कलम ही प्रेम की गाथा ,बिना रुक रुक के लिखती है
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लिखावट आपकी जैसा उसे , प्रयोग करते हो
कलम उतना ही लिखती है जितना तुम लेख लिखते हो
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कलम श्रंगार लिखती है ,कलम अंगार लिखती है
मिटे जो देश के खातिर ,नमन सौ बार लिखती है
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कलम का भाव तो देखो ,यह सब का भाव लिखती है
बिना रुस्वत किये लोगों का ,अक्सर प्यार लिखती है
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कलम कवियों को ऐसा प्यार देती है
लिखे जिस भाव से उसे वह भाव देती है
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कलम की बदौलत से मिला है प्यार कवियों को
कलम की बदौलत से मिला  सम्मान कवियों को
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         🌷 प्रेमी ने चाँद से माँगी मदद 🌷
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ए चांद अपनी चांदनी से , कह दे एक बार
ढूंढ कर मिला दे , कहां है मेरा यार
दिन में देखता हूं , तो नजर नहीं आती
रात को हो सकता है , हो खाली बैठती
बहुत दिन हुए कहीं , नजर ना आ रही
पता नहीं वह कहां कहां , है जा छुपी
ए चांद अपनी चांदनी से , कह दे एक बार ...
ए चांदनी थोड़ी सी , मुझपे कर दे तू दया
बरसो बिछड़े साथी को , मिला दे एक बार
ए चांद अपनी चांदनी से कह दे एक बार...............

     --------   प्रेमिका की मंजुल का वर्णन   --------
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तेरी चाहत का दरिया देख , दिल ये कहता है
प्यार तुझसे ही करूं , और सब तो धोखा है
चांद तुझे देखकर हर , दम ओ मोन रहता है
तेरी मंजुल को देख , चांद भी चुप रहता है
तेरी चाहत का दरिया ..........................
तेरी जुल्फों की अदा , देख घटा छाती है
चकवा चकवी एक दूजे से , बिछड़ जाती है
तेरे ललाट की ऐसी ,  ओ चमक आती है
सारे संसार का अंधेरा ,ही हर लेती है
तेरी चाहत का दरिया ......................
तेरे कजरारे नैन लगते बड़े ,प्यारे हैं
तेरे पलकों की छांव बैठे , हम दीवाने हैं
तेरी मुस्कान हमें लगती, बड़ी प्यारी है
तेरे होठों की अदा , खूब ही निराली है
तेरी चाहत का दरिया देख , दिल ये कहता है
प्यार तुझसे ही करूं ,और सब तो धोखा है ।।
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                      --------- शायरी --------
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किसी की याद में गुजरा
ये जीवन अब सताता है
मिले बरसों हुए तुमसे
ये  जीवन अब सताता है ।।
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चांदनी रात सी तू सुहानी लगे
जिंदगी तेरे बिन कयामत लगे
मिल जाए पुनः प्यार तेरा सनम
रोशनी ही जहां की दीवानी लगे ।।

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आंख में दर्द प्यार का झलकता रहा
वह मुझे हर समय देखता ही रहा
प्यार ऐसा हुआ दिल मचलता रहा
दिल के दरवाजों से वो धड़कता रहा

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जिंदगी हमको ऐसी लगने लगी
हमसफर के बिना यूं उजड़ने लगी
कोई दर्द समझ हाथ मेरा ले थाम
वरना जिंदगी तो यूं ही निशा होती रही ।।

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  ----: तेरी याद :----
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तुम्हारी याद के मौसम हमें ,अक्सर बुलाते हैं
तुम्हें जाने की चाहत में , यूं खुद को मिटाते हैं
तुम्हें आना हो तो आओ , हमारी दिल की महफिल में
तुम्हारे बिन तो हम दिल को , बस यूं ही  जलाते हैं

कवि  संजय कुमार श्रीवास्तव
जन्म  1 सितम्बर 1997
शिक्षा   बी0ए0
ग्राम   मंगरौली
पोस्ट  भटपुरवा कलां
जिला  लखीमपुर खीरी
राज्य   उत्तर प्रदेश

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