Rambriksh Bahadurpuri 22 Sep 2026 कविताएँ समाजिक #बेटी पर कविता # बेटी के पढ़ाई पर कविता # परस्थितियों पर कविता 335 0 Hindi :: हिंदी
मैं पढ़ूंगी पापा! मुझे नहीं चाहिए “ नयी किताबें” मैं पढ़ लूॅंगी “ पुरानी “ या मांगी हुई “ किताबों ” से, मैं नहीं देख पाती हूॅं मेरे लिए आप की “ तपस्या” आप का “ त्याग “ किन्तु, हार न मानने की आप की “ सलाह “ आगे बढ़ने की “ प्रेरणा “ मुझे आगे बढ़ाता है, लोगों के तानें ,मजे,हॅंसी कि “ मैं बेटी हूॅं “ क्या करूंगी पढ़कर? मुझे मजबूत करते हैं “ जीतने के लिए” पापा! मैं आप की “ भरोसा” हूॅं आप का विश्वास हूॅं मैं पढ़ूंगी, बढ़ूंगी मिटाऊंगी बेटा - बेटी के बीच की भेद मिटेगीं आप की मजबूरियाॅं। रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...