शरद भूषण मोंगरा 29 Sep 2026 कविताएँ धार्मिक ईश्वर 1240 0 Hindi :: हिंदी
"सत्यसार नहीं प्रतिबंधित, भीतर जाकर खोज करो।" "कहां किसकी माने बैठे हो, खुद सोचो ज़रा होश करो।" "जग का मालिक बैठ देह में हो गया बंद अलेप" "चहुं दिसों माया बिखरी है, मालिक है निरलेप" शरद भूषण मोंगरा