ATHARV YADAV 10 Aug 2026 कविताएँ समाजिक शिक्षा और देश की रेस rohirt yadav atharvyadav 2058 0 Hindi :: हिंदी
शिक्षा नहीं व्यापार बन गया है शिक्षक बिक रहे हैं, चंद पैसों में सौदा कर रहे हैं। नई विपत्ति आ रही है, नई पीढ़ी मार खा रही है। परंतु सरकार के लिए तो मधु है ना, जब तक लाल बत्ती उन्हें वीआईपी बना रही है। जल्दी ही यह तुम्हें बांट देंगे, जाति धर्म के नाम पर ज्ञान देंगे, हर बच्चे का पेट भरना था, बस ध्यान यही धरना था। हर बच्चा का अधिकार शिक्षा थी , पर शिक्षा तो बट गई दीवारें यहां खींच गई।। आज नहीं, पर एक दशक में देश गिरने लगेगा, हमारा रुपया डॉलर के सामने बोना लगने लगेगा। बच्चे फांसी पर चढ़ रहे हैं। यदि आंदोलन हो तो बच्चे आतंकवादी बन रहे हैं, पुलिस को ऐलान किया है, जलियांवाला बाग के बाद दूसरी बार किसी ने विश्वासघात किया है। तुम क्यों नहीं बच्चों को पढ़ा रहे? तुम क्यों नहीं इन्हें ड्रोन टेक्नोलॉजी सिखा रहे? नाज मुझे है देश पर, नाज मुझे इस माटी पर पर बच्चे देश छोड़कर जाते हैं, दूसरे देश वाले मुंह मांगी कीमत लगाते हैं। यूं ही चलता रहा तो शिक्षक की शिक्षा में सामर्थ्य ना होगा, देश में 50 फीसदी बच्चा अनपढ़ होगा।। शिक्षा न्यूनतम पैसों में उपलब्ध करा दो, अच्छा रोजगार बना दो। रोजगार का मतलब 12 हजार ना हो, वह अपना घर चला ले परेशान ना हो। शिक्षा व्यवस्था को गरीब अमीर सबके अनुकूल बना दो, जिससे विश्व गुरु बनने का सपना साकार हो, वरना अंजाम पतन होगा, देश का असली सोना खत्म होगा। भारत की जय जयकार हो , हमारी कलम से लिखा वचन भवानी साकार हो, जय मातृभूमि जय हिंदुस्तान हो।।