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शिक्षा की डोर

Prerna sharma 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक # शिक्षा की डोर 43125 0 Hindi :: हिंदी

सबसे पहले अपने माँ  से ही मुझे सीखते हो 

कोरे कागज पर कलम की मदद से गोल गोल घुमा कर मुझे समझते हो,

 पाठशाला में अपने कर्तव्य को समझते हुए मुझे पढ़ते हो,

 परीक्षा में असफल होने के डर से  मेरा अध्ययन करते हो,

अपनी  विनर्मता की पहचान से मेरा परिचय देते हो,
 
बाबा की साइकिल पर बैठकर मेरे लिए गांव से शहर तक चले आते हो,

मुझे अधिक से अधिक जानने के लिए  कोचिंग का सहारा लेते हो ,

कहीं तुम मुझे ना भूल जाओ इसलिए तुम रोज भगवान  से प्रार्थना करते हो,

    क्योंकि मैं एक शिक्षा हूं मुझे ग्रहण करना तुम्हारा  रिवाज नहीं बल्कि जन्मसिद्ध अधिकार है. 


 लेखिका प्रेरणा शर्मा

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