Tanay Tripathi 25 Oct 2026 कविताएँ समाजिक #दशहरा #समाज #दुख 40 0 Hindi :: हिंदी
दशहरा 🚩 हुआ है अंत रावण का, पर अभी भी समाज में बुराई है। तो क्या रावण नहीं जला, या जलाने वालों में राम नहीं? दशहरा सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, अच्छाई की जीत का पैग़ाम है। जिस दिन समाज का रावण मरेगा, वही सच्चे अर्थों में दशहरा है। जल रहा पुतला रावण का, फिर भी बुराई ज़िंदा है। हो रहा राम नाम का जयघोष, फिर भी क्यों इंसानियत शर्मिंदा है? असली रावण तो समाज में अभी भी है, कहीं अहंकार, कहीं अत्याचार में। कहीं बेटियों की बेबसी में, तो कहीं इंसान के व्यवहार में। तीर चलाकर रावण को जलाना बहुत आसान है। समाज में बहुत रावण हैं, ज़िंदगी में राम बनकर दिखाना है। जिस दिन इंसान के कर्म बदलेंगे, जिस दिन अन्याय के बंधन खुलेंगे, उस दिन सिर्फ़ पुतले नहीं जलेंगे, हम सच में राम के आदर्श पर चलेंगे।