AJAY ANAND 20 May 2024 कविताएँ दुःखद उदासी, मन , मुस्कान, उम्र, 33630 0 Hindi :: हिंदी
मन हो जब उदास , सच्ची मुस्कान कहां से लाऊं। अपनों ने ही जिसे अपना नहीं समझा, गैरों को अपने पास कैसे बुलाऊं।। समझ गया मैं फीके मुस्कान के पीछे का राज। देखकर उसे अब मैं कैसे मुस्कुराऊं।। मुस्कुराना भी तो एक कला है। ऐसी कला मैं कहां से लाऊं।। जैसा हूं मैं, बस वैसा ही रहने दो। पूरी उम्र अब यूं ही गुज़ार दूं।।।