Kamlesh Kumar Kumawat 02 Jun 2026 आलेख समाजिक #socialmedia #relationship #family 10205 0 Hindi :: हिंदी
आधुनिक समय में सोशल मीडिया लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जहाँ लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य किया है, वहीं दूसरी ओर यह रिश्तों और परिवारों में दूरियाँ बढ़ाने का कारण भी बनता जा रहा है। आज परिवार के सदस्य एक ही घर में रहते हुए भी मोबाइल की स्क्रीन में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि आपसी संवाद धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। पहले परिवार में लोग साथ बैठकर बातचीत करते थे, सुख-दुख साझा करते थे और रिश्तों में अपनापन महसूस होता था। लेकिन अब भोजन के समय भी लोग मोबाइल चलाने में व्यस्त रहते हैं। माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पा रहे और बच्चे भी आभासी दुनिया में खोते जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि परिवारों में भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है। सोशल मीडिया पर दिखावटी जीवनशैली ने भी लोगों की मानसिकता को प्रभावित किया है। लोग दूसरों की चमक-दमक देखकर अपने जीवन से असंतुष्ट होने लगे हैं। पति-पत्नी के रिश्तों में अविश्वास, तुलना और गलतफहमियाँ बढ़ रही हैं। कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं, जो परिवार के टूटने तक की स्थिति पैदा कर देते हैं। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया की लत बच्चों और युवाओं के व्यवहार पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। वे वास्तविक दुनिया से दूर होकर आभासी मित्रों और मनोरंजन में अधिक समय बिताने लगे हैं। इससे पारिवारिक संस्कार, संवाद और सामाजिक जिम्मेदारियों का भाव कमजोर पड़ता जा रहा है। हालाँकि सोशल मीडिया स्वयं में बुरा नहीं है, लेकिन इसका अत्यधिक और गलत उपयोग चिंता का विषय अवश्य है। यदि इसका संतुलित उपयोग किया जाए तो यह ज्ञान, जानकारी और संपर्क का अच्छा माध्यम बन सकता है। परिवारों को चाहिए कि वे प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर एक-दूसरे के साथ बिताएँ। माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए तथा सामाजिक मूल्यों को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए। रिश्तों की मजबूती केवल तकनीक से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और संवाद से बनी रहती है। यदि समय रहते हम सचेत नहीं हुए, तो सोशल मीडिया की आभासी दुनिया हमारे वास्तविक रिश्तों को कमजोर करती चली जाएगी।