VINAY KUMAR PATEL 03 Oct 2026 कविताएँ अन्य विश्व का स्वरूप 556 0 Hindi :: हिंदी
विश्व का स्वरूप बनते बिगड़ते इस विश्व में समझते समझाते इस विश्व में! मृत्यु से पहले इस विश्व में जीवन की नैया को पार लगाते! बदलता है क्यों परिवेश विश्व का होता है नियम परिवर्तन विश्व का! जाने कैसे विश्व का स्वरूप बनाते हैं जब प्रभु का रूप! अनंत ब्रह्मांड को जाने कैसे मन की अद्भुत शक्ति से! होते हैं ब्रह्मांड में अनेक ग्रह भेजते हैं जो अद्भुत संदेश यह! अंश हैं हम उस परमात्मा के रहते हैं जो प्राणियों के हृदय में! विनय पटेल "कठिन"