Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

सब कुछ बोल गई

शरद भूषण मोंगरा 07 May 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत सब कुछ बोल गई 6287 0 Hindi :: हिंदी

"वह फिर भी सब कुछ बोल गई"

बिन साज श्रंगार किए ही वह 
मनभावन तरुणी लगती थी 
चपल नहीं थी शांत भाव में 
खिली कुमुदिनी लगती थी 
वह कुमारी सुकुमारी 
मधुबन पे जवानी लगती थी 
धीर दिशाओं में बजती सी 
मधुर रागिनी लगती थी 
प्रकृति की सुरसुंदरी थी 
सारंगी सी हंसती थी 
लोल लाज से झुके हुए 
वह दिल का दर्पण खोल गई 
और अधर तनिक से हिले नहीं 
वह फिर भी सब कुछ बोल गई।
शबिन साज श्रंगार किए ही वह 
मनभावन तरुणी लगती थी 
चपल नहीं थी शांत भाव में 
खिली कुमुदिनी लगती थी 
वह कुमारी सुकुमारी 
मधुबन पे जवानी लगती थी 
धीर दिशाओं में बजती सी 
मधुर रागिनी लगती थी 
प्रकृति की सुरसुंदरी थी 
सारंगी सी हंसती थी 
लोल लाज से झुके हुए 
वह दिल का दिल का दर्पण खोल गई 
और अधर तनिक से हिले नहीं 
वह फिर भी सब कुछ बोल गई।

शरद भूषण मोंगरा 
कवि गीतकार लेखक

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: