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मेरी बगिया
प्यारे बच्चे मेरी बगिया के ये फूल प्यारे प्यारे रंग बिरंगे सुंदर सलोने हर एक में है एक अलग रंग हर एक में है एक अलग उमंग सबको बस एक ही अ�
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आओ शिक्षा के दीप जलाएं
24 शिक्षा आओ शिक्षा के दीप जलाएं हम सब मिलकर पढ़े पढ़ाएं अंधियारे को दूर भगाएं हम सब मिलकर पढ़े और पढ़ाएं एक भी बच्चा छूटने न पा�
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जो छूटा
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना
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जो छूटा
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना
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टूटे हुए अक्स
टूटे हुए अक्स समेटने मैं चला, अपनी कहानी लिखने मैं चला, अकेले चलने का हुनर है मुझमें, अपने वजूद को समेटते मैं चला, माज़ी की यादों को पीछे
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ज़माने भर का
ज़माने भर का ग़म उठाए फिरते हो क्या रंज है जो छिपाए फिरते हो कभी तो आओ देहरी पर हमारे हर गम को भूल जाओगे शब से पहले गर मुस्कुराओगे तो ज�
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ढलती उम्र – एक एहसास
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ�
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ढलती उम्र – एक एहसास
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ�
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ढलती उम्र – एक एहसास
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ�
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गाँव – मेरी जड़ों की खुशबू
गाँव – मेरी जड़ों की खुशबू नंगे पाँव वो पगडंडी, अब भी रुला देती है, जहाँ बचपन ने कंचों की दुनिया रची थी। वो कच्चे मकान की मिट्टी, जो हाथ�
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गाँव – मेरा पहला प्यार
गाँव की गलियाँ, वो बचपन की बातें, माँ की ममता, दादी की सौगातें। बिलकुल कच्ची पर दिल से पक्की, वो मिट्टी की खुशबू, वो अमर बेल की लच्छी। त�
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गाँव – मेरी पहचान
वो मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू, वो खेतों की राहें, जहाँ हर सुबह उम्मीदों की किरणें हैं चाहें। नदी के किनारे वो रेत की बिछौनी, जहाँ बचपन ने ल�
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