Pravin Chaubey 15 Feb 2025 कविताएँ देश-प्रेम #poitry#kavita #sayari#poeam#kavy 17553 0 Hindi :: हिंदी
गाँव की गलियाँ, वो बचपन की बातें,
माँ की ममता, दादी की सौगातें।
बिलकुल कच्ची पर दिल से पक्की,
वो मिट्टी की खुशबू, वो अमर बेल की लच्छी।
तालाब किनारे की वो ठंडी शामें,
नंगे पाँव खेतों में दौड़ते अरमान।
हल की लकीरों में सपने सजाना,
खेतों की हरियाली में गीतों का आना।
पड़ोसी भी अपने, गलियाँ भी जानती,
हर दर्द में गाँव की मिट्टी मरहम बनती।
शहरों में दौड़ा, बहुत कुछ कमाया,
पर गाँव की रोटी सा स्वाद ना पाया।
छूटे हुए रिश्ते, वो पीपल की छाँव,
अब भी बुलाती है वो कच्ची ठाँव।
जहाँ नींद भी मीठी, सपने भी प्यारे,
वो गाँव ही तो थे अपने सबसे न्यारे।
"शहरों में भले ही सपने बसते हैं,
पर सुकून तो गाँव की मिट्टी में ही मिलते हैं।"
✍️ प्रवीण चौबे
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