# महुआ के फूल ...
आदिवासियों का ,
है यह जीवन मूल
खिलने लगे हैं ,
अब महुआ के फूल ...
तपिश बड़ी ,
झुलसाती
नहीं कहीं ,
कोई छईआं...!
इस मौसम ,
टप - ट� read more >>
!! *दिव्यांग -दृष्टि हीन और लालटेन* !!
एक गांव में एक दिव्यांग - दृष्टिहीन (अंधा) व्यक्ति रहता था। वह रात में जब भी बाहर जाता, एक जलती हुई लाल read more >>
पहन लेते है ज़ब ये वर्दी इस तन पर
तब हम हम नहीं रहते है,
जो रह चुनी है देश की खातिर
हम हर पल आगे रहते है,
छुट्टी लेकर आयी थी भाई की शादी की
फ़� read more >>
कविता और कवि ...
ये तो है ,
बिखरती चांदनी ,
गुनगुनाती रागनी ,
महकती बहती हवा ...!
किसी ने दर्द ,
किसी ने मरहम
किसी ने खुशी ,
किसी ने गम कहा ...!
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