खिलौनों से खेलने वाला इंसान,
खिलौने की तरह बन गया है,
तूने खुद को समझाया ही नहीं,
सच है ये कि खिलौना बेजान है,
अभी भी जाग जा तू इंसान हैं,
read more >>
बस लब्ज है!!
दुख इतना है कि शायर बन गया,
दर्द इतना है कि घायल बन गया,
गुम हूं कहीं,
ठोकर खा, भटकता सा पागल बन गया,
कहां मैं उसके लायक बनने च� read more >>
काश! समंदर के बीच कहीं खो जाता,
ना किनारे की उम्मीद ना मंजिल की,
बस लहरें जहां ले जाए वही चलता जाता,
आश जैसे खत्म हो गई, वैसी ये घड़ी आई है , read more >>