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पिली साड़ी बाली नखरे खूब दिखाती हैं सारि सारि रात जगाती हैं अपने हुस्न के जादू से मुझपे रौब खूब जमाती हैं पिली साड़ी बाली थोड़ी नखरेल read more >>
तीन रंग का प्यारा झण्डा मेरे मन को भाये कसम है भारत माँ की आँच न इसको आए भारत की है जान तिरंगा हमारी है पहचान तिरंगा हम सब की है शा� read more >>
बेटी पूछे मां बापू से, मैंने कौनसा पाप किया। दुनिया देखन से पहले ही, क्यों मुझे कोख में मार दिया। राखी बांधूंगी भैया को, संग उनके पड़� read more >>
बहुत दिनों जो थें परतंत्र , लड़ी लड़ाई हुएं स्वतंत्र , लागू हुआ है तब जनतंत्र , भारत बना‌ है अब गणतंत्र। इस शुभ दिन की चाह में , देशभक्� read more >>
है तृप्त वेदना भारत कि, कल - कल, कल - कल रत्नेश बहे! यहां धरा के र्जर्रें - र्जर्रें में, मातृ प्रेम का धार बहे!! रस भर जाता हैं कवी � read more >>
यह रूप मेरा है ऐसा प्रिय तुम्हें दिखा न् सकती हूँ। मेरे मन की पीड़ा प्रिय मैं तुम्हें सुना न् सकती हूँ।। फीके पड़ गए रंग मेंहदी के इसे स� read more >>
पराक्रम दिवस है आज पराक्रमी की याद में, सारे शब्द बोने हैं तेरी महिमा के नाद में। ग्यारह बार जेल गए थे, फिर भी आजाद हिंद फौज के नेता थे� read more >>
मनुष्य कई गुणों की खान। मानव के जीवन में, चरित्र मूल्यवान्। धन लुटा, कुछ नहीं लुटा, समय लुटा, तो लुटा कुछ। चरित्र लुटा, सब कुछ लुटा, मनुष read more >>
तेरे नाम से इस कदर रोया आज ---2 तुम रुह हो मेरी -- मैं जिस्म हूँ तेरी , तुम बिन कैसे जीऊँगा , लौट के आ जाओ ---2 तुम बिन अधूरा हर साज़ , करो दास्ताँ � read more >>
किसे सुनाऊँ दास्ताँ ग़म की ---2 आज भी रुला जाती है , रवानी शाम की --- कहकशाँ सी धुंधली सूरत ---2 जहाँ में तुम आफ़ताब ईद का , बेताब है दिन , बेचैन रा� read more >>
गम को भूलाने की बहाने बहुत की ---2 आलम में मुस्कुराना है , दामन में काटें को खिला के ---2 होठों में गुलशन को खिलाया हूँ , बहाने की बहुत तुझे भ� read more >>
कर निर्माण नीड़ो का और कहीं/ पतझड़ का मोसम जो बीत गया, पत्तों का रंग तो सूख गया, अंधेरों का कल में सोर नहीं, कर निर्माण नीड़ो � read more >>
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