बहुत दिनों जो थें परतंत्र ,
लड़ी लड़ाई हुएं स्वतंत्र ,
लागू हुआ है तब जनतंत्र ,
भारत बना‌ है अब गणतंत्र।
इस शुभ दिन की चाह में ,
देशभक्� read more >>
तेरे नाम से इस कदर रोया आज ---2
तुम रुह हो मेरी --
मैं जिस्म हूँ तेरी ,
तुम बिन कैसे जीऊँगा ,
लौट के आ जाओ ---2
तुम बिन अधूरा हर साज़ ,
करो दास्ताँ � read more >>
किसे सुनाऊँ दास्ताँ ग़म की ---2
आज भी रुला जाती है ,
रवानी शाम की ---
कहकशाँ सी धुंधली सूरत ---2
जहाँ में तुम आफ़ताब ईद का ,
बेताब है दिन , बेचैन रा� read more >>
गम को भूलाने की बहाने बहुत की ---2
आलम में मुस्कुराना है ,
दामन में काटें को खिला के ---2
होठों में गुलशन को खिलाया हूँ ,
बहाने की बहुत तुझे भ� read more >>