वो पल थे कभी सुन अजनबी।
मां की गोद में पले मां की गोद में बड़े।
वो खुशियों के दिन मां के बिन।
मिल ना सके-2
मां का प्यार स्नेह दुलार सबको � read more >>
आज़ाद - ए - आज़म देश मेरा,
इनके त्री - अशुल निरालें हैं!
सत्य, धर्म, और ज़ोश - ए - वतन,
कण - कण मे वतन के प्यारें हैं!!
प्यारी है वतन कि द� read more >>
जब सब ख़त्म सा लग रहा था,
जब हर शुरुआत ही अंत लग रहा था,
जब हर काम को बेमन से करना जारी था,
जब खुद के पेट के लिए खुद का खाना तक लाचारी था।
जब ल read more >>
कदम हार के डर से आगे ही नही जाते हैं,
हारे हुए लोग कुछ, जीत की अहमियत सिखाते हैं।
वे हारे हैं.... मैदान छोड़कर भागे तो नही,
उनको इतना अनुभव न read more >>
एक घर के सामने सडक बन रही थी,
गरीब मजदूरिन वहाँ काम कर रही थी.
मजदूरिन के घर का सारा बोझ उसी पर पडा था,
उसका नन्हा सा बच्चा साथ ही खडा था.
उ read more >>
ठन गई!
मौत से ठन गई!
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई� read more >>
देखते ही देखते जवान,
“माँ-बाप” बूढ़े हो जाते हैं…
सुबह की सैर में,
कभी चक्कर खा जाते है,
सारे मौहल्ले को पता है,
पर हमसे छुपाते है&hellip read more >>