ना जाने कौन सी
हिमाकत की थी वक्त के साथ हमने,
जिससे ऐसी नजाकत पेश की वक्त ने।
आज वक्त,
बेवक्त में ही काल बनकर आ रहा,
इस धरा पर काले बादल स� read more >>
आप की ख़त को ,आज पढ़ रहा हूँ।
इतना लिखी हो ख़त ,,की सुबह-शाम पढ़ रहा हूँ।।
इक़्श में बीते सुख-दुःख आज ख़त में पढ़ रहा हूँ।
जो बीत था पल इक़्श का ,व� read more >>