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मेरे मन की खिड़की में बैठे राधेश्याम
मेरे मन की खिड़की में बैठे हैं राधेश्याम, थोड़ी सी खोलकर देखो दिख जायेंगे राधेश्याम। जय श्री राधे कृष्णा
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राम सिया की जोड़ी बड़ी सुन्दर लगती हैं
राम सिया की जोड़ी बड़ी सुन्दर लगती हैं,राम जैसा पुरुष,सीता जैसी नारी दुनिया में अब कहां दिखती हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम,सभ्यता संस�
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मैया मेरे मन में तश्वीर लगी हैं तुम्हारी
मेरे मन में तश्वीर लगी हैं तुम्हारी मैया, आंखें बंद करु या या खोलू, तुम ही नजर आओ मैया। जय मां लक्ष्मी 🙏
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भाषा सीखने का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
किसी भाषा को सीखने का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण होता है, जो केवल तीन हैं। इसी के आधार पर कोई भाषा सीखी और सिखाई जाती है। 1. जिज्ञासा-जानन
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।। आयुर्वेद का दीप जलाएँ जीवन ।।
जीवन और विज्ञान का, जो शास्त्र ज्ञान करवाता है। है वेदो ने भी मान लिया, वह आयुर्वेद कहलाता है।। आयुर्वेद को अपना कर, जीवन में खुशहाल�
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।। तेरी यादों में.. ।।
तेरी यादों में तेरी यादों में । तेरी यादों में तेरी यादों में ।। सपने बुनता हूँ तेरी यादों में। सपने बुनता हूँ तेरी यादों में।। रहू�
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।। प्रेम ।।
चाँद के जैसी अठखेली, महबूब मेरा भी करता है। दिल तरसे दीदार को वो, निकले झट छुप जाता है।। सिवाय उसके दिल को मेरे क्यों और ना कोई भाता ह�
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कुछ कहते नही बनता
क्या कहूं कुछ कहते नही बनता वादे कुछ ऐसे होते है हमारी सरकारों के, कोशिश बहुत करते है बेचारे,पर इनसे निभाते नही बनता। क्या कहूं कुछ कह�
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पिता
मज़बूत कंधों पर बिठा, आंगन में घुमाते। कभी-कभी तो मेरे लिए , मेरे जैसा बन जाते। गिरने पर, शाबाश, शेर बेटा कहते। लड़खड़ाते पांव, बांहों म�
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रात का चांद
रात का चांद किसी और के हैं वो हमें तो बस खाली आसमान नज़र आता है अब।। आंचल भरा रहता था जो चांद तारों से ,अब वही फटा नज़र आता है अब।। कोई सा
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जन्मदिन पर कुछ पंक्तिया
तुम्हें देख दिल खुद हँस पड़ता हैं तुम्हें ना देख दिल कहाँ समझा पाता हैं अपनें दादा जी की धड़कन और दादी की दुलारी हों,,, अपनें चाचा की चम�
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रिश्तों का मोल
रिश्तें बड़े कीमती होते हैं, इनको संभालकर रखिए, इनका पैसों से मोल ना लगाइए, इनको प्रेम भाव से सींचइए्
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