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आईना सच बोलती है कभी इसको आज़मा के देखना इसके अंदर अपने झक के देखना लेकिन बिदकना मत अपने आँखों में आँखें डाल के देखना आईना सच ही बोल� read more >>
चलो कही दूर चले चाँद तारों के सैर करे चलो चले वहां जहां कोई गम न हो न हो दुनिया का डर न कोई ताकने बाला न झाकने बाला न हो कोई झरोखा वस read more >>
तमाशा ही तमाशा है जिधर देखो उधर नेता गण मसगुल है मशहूर होने के लिए समय यहाँ मजबूर खेल देखने के लिए अंधेर नगरी चौपट राजा ऐ सच कहा थ� read more >>
डर मत मज़धार से तू, तैर के उसे पार कर जीत होगा हौसले कि खुद को बुलंद कर तुम ही तस्कार हो और चमत्कार भी मत मांग उधर रोसनी रात कि अंधकार से � read more >>
रुपया रुपया बना पैसा और पैसा बना तमाशा कैसा कैसा खेल दिखाए पैसा पैसा पैसा पल में राजा पल में रंक पैसा पैसा पैसा अपने पवार का रोव जम read more >>
ऐ शहर अजनबी सा क्यों है हर तरफ धुआँ धुआँ सा क्यों है लोग यहाँ जुदा जुदा क्यों है हर तरफ भूख मरी सा क्यों है लोग यहाँ परेशान सा क्यों ह� read more >>
वैरी हैप्पी है आज हम पियेगे आज फुल हम चाहे कोई रोके ना रूकेगे हम पियेगे जमके आज रम लगता कोई घटना आज हुई जैसे खुशियो की शुरूआत हुई लग read more >>
रंग भी तू और नूर भी तू धुप भी तू और छाँव भी तू धरती और आकाश भी तू चाँद भी तू चकोर भी तू चचल और चित चोर भी तू फूल भी तू कुसम भी तू राग भी तू स� read more >>
कच्ची सड़क ,हरे-भरे खेत,अगल बगल हरे-भरे घास... खुला आसमां ,जोर जोर से बहती पुरवैया... शोर शरावा तो बिलकुल भी नहीं... वे गाँव कहलाते थे... अब वे read more >>
हास्य-व्यंग्य आंदोलनजीवी पड़ोसी ने मुझसे पूछा,‘‘भाईसाहब, अभी तक मैंने परजीवी शब्द सुन रखा था, जो दूसरे का खून चूसकर जिंदा रहता ह� read more >>
जिंदगी कुछ तो बता अपना पता read more >>
चल रहा हुज्जत वक्त के अहंकार से ईट ईट बिखर रहा घर के दीवार से वो निःस्सहाय बूढी औरत क्या करे कैसे लड़े समय के काल चक्र से तिन का तिन क read more >>
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