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दीपक

Umendra nirala 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Umendra nirala poetry .com 54076 1 5 Hindi :: हिंदी

देख बुराई अपने अंदर
इसे मरना ही चाहिए,
जीवन में फैला अंधेरा
मिटना हि चाहिए।
यह दीपक है
इसे जलना ही चाहिए।
लगी विचारों में बरसों की दीमक
इसे हटना ही चाहिए,
विरासत में पाया रूढ़िवादिता और अंधविश्वास
इसे जलना ही चाहिए।
यह दीपक है
इसे जलना ही चाहिए।
अपने को सर्वोच्च समझना
यह वहम हटना ही चाहिए,
मानव में ही ऊंच-नीच की लगी जंग
यह गलना ही चाहिए।
यह दीपक है
इसे जलना ही चाहिए।
घमंड से भरी आखें तेरी
इसे गिरना ही चाहिए,
और द्वेष ईर्ष्या और अस्पृश्य भावना को
अवगुण कहना ही चाहिए।
हर बुराई से जीतने के लिए,
ज्ञान के दीपक को जलना ही चाहिए।
यह दीपक है,
इसे जलना ही चाहिए।
                              

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Umendra nirala
Umendra nirala It's is a very useful app.and write a poem good platform

3 years ago

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