//... छोटी सी गुजारिश...//
जब से
लगी है ,
कमबख्त ये ,
इश्क-लत...!
तलब इसकी ,
वक्त बे-वक्त...!
कभी सख्त ,
कभी सहज...!
ऐ खुदा -
तूने इसमें ,
जुदाई , तन्ह� read more >>
माया
माया की इस नगरी में , सब माया से दूर हैं
माया तो उस के पास, जिस के पास में माया हैं
इस दुनिया में सबसे बड़ा ,माया ही तो छाया हैं
जो मा� read more >>
थाली - "(एकता का पात्र , जिम्मेदारियों का वाहक )"
कहते है कि रोटी-कपड़ा-मकान मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है परंतु यह कदाच� read more >>
" मैं पैसा हूँ "
अरे ... मैं पैसा हूँ रुपया बनाता हूँ,
लोगों को उनकी औकात बताता हूँ ,
ज़रा तुम उस पुराने गुल्लक को तो तोड़ो जिसमे मैं अशोक read more >>