डर मत मज़धार से तू, तैर के उसे पार कर
जीत होगा हौसले कि खुद को बुलंद कर
तुम ही तस्कार हो और चमत्कार भी
मत मांग उधर रोसनी रात कि अंधकार से
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रंग भी तू और नूर भी तू
धुप भी तू और छाँव भी तू
धरती और आकाश भी तू
चाँद भी तू चकोर भी तू
चचल और चित चोर भी तू
फूल भी तू कुसम भी तू
राग भी तू स� read more >>
कच्ची सड़क ,हरे-भरे खेत,अगल बगल हरे-भरे घास...
खुला आसमां ,जोर जोर से बहती पुरवैया...
शोर शरावा तो बिलकुल भी नहीं...
वे गाँव कहलाते थे...
अब वे read more >>
हास्य-व्यंग्य आंदोलनजीवी
पड़ोसी ने मुझसे पूछा,‘‘भाईसाहब, अभी तक मैंने परजीवी शब्द सुन रखा था, जो दूसरे का खून चूसकर जिंदा रहता ह� read more >>
आज के मशीनी युग में मानव इतना व्यस्त है कि अपने व्यस्त जीवन में ना तो व्रत रख सकता है और ना ही लंबे समय तक पूजा उपासना कर सकता है परंतु यद read more >>