हमारा मन अनंत है, और मन के कोने में, हम जिस विचारों को धारण करते हैं, जैसे कोई आधी बातें लिखकर, राइटर उसे
पूरा करना चाहता है, समस्त रचना म read more >>
प्रथम अंक
हम उन दिनों की बात करता हु कि जब मै , नारण लाल , कालूराम, जितेद्र सिंह और अरविन्द जैन आदि एक छोटे से विद्यालय में पढ़ने जा रहे हो read more >>
ना किसी के आने की
उम्मीद है मुझे....!
और ना किसी के जाने का
गम रखता हूं....!
मैं..ख़ुद..मैं..ख़ुद का
मुसाफ़िर..हूं....!
तभी नजदीकियां
कम रखता हू read more >>
हाये बेचारी अबला नारी,
दहेज प्रथा की कैसी ये बीमारी,
ना मान मिला ना सम्मान मिला,
रोती आ रही है नारी,
आंखों में भरकर नीर,
सब सहती आ रही है � read more >>
उसका नाम विनोद था, सारी जिम्मेदारियां,
उसके कंधों पर था,
वह प्रतिदिन अपने पिता के लिए, शराब लाने के लिए, जाया करता था, उसी शराब के कारण, � read more >>