प्रथम अंक
हम उन दिनों की बात करता हु कि जब मै , नारण लाल , कालूराम, जितेद्र सिंह और अरविन्द जैन आदि एक छोटे से विद्यालय में पढ़ने जा रहे हो read more >>
ना किसी के आने की
उम्मीद है मुझे....!
और ना किसी के जाने का
गम रखता हूं....!
मैं..ख़ुद..मैं..ख़ुद का
मुसाफ़िर..हूं....!
तभी नजदीकियां
कम रखता हू read more >>
हाये बेचारी अबला नारी,
दहेज प्रथा की कैसी ये बीमारी,
ना मान मिला ना सम्मान मिला,
रोती आ रही है नारी,
आंखों में भरकर नीर,
सब सहती आ रही है � read more >>
उसका नाम विनोद था, सारी जिम्मेदारियां,
उसके कंधों पर था,
वह प्रतिदिन अपने पिता के लिए, शराब लाने के लिए, जाया करता था, उसी शराब के कारण, � read more >>
उसका नाम रतन था, लोग उसे काबुलीवाला, इसलिए कहते थे, कि उसके मासूम दिल में, सबके लिए प्रेम था, और उसने एक दिन_ अपनी जाने निछावर कर दी_ यह दर् read more >>
कल का पता न पल का पता, बांधता मन-मन की।
जवानी के झाग झांवर गए, रेनी मैली भवन की।
ठान खोदता, आन अज़माता, सुध न रही कंचन तन की।
तेरा, मेरा मिट read more >>