मुखड़ा- एकही हा बात के भाई बावे हमके खेद जी,
प्यार में काहे लोगवा करेला भेद जी,
केहू चाहे दिल ता केहू चाहे छेद जी,
प्यार में काहे लोगवा कर� read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>